Cumin Seeds Information In Hindi

Cumin Seeds Information In Hindi

Cumin Seeds Information In Hindi जीरे की खेती की उन्नत तकनीक को समझे

 जीरे की खेती की उन्नत तकनीक को समझे

जीरे की खेती

जीरा एक ऐसी फसल है जो सभी घरों के रसोईघर में पाई जाती है | एक मसाले के रूप में इसका उपयोग किया जाता है, इसकी मांग पुरे देश में है | जिसके कारण किसानों को अच्छी कीमत मिलती है | जीरा की खेती और सभी तरह की खेती की अपेक्षा ज्यादा लाभदायक है | लेकिन जीरा की खेती में सही तरीके से मौसम , बीज , खाद, तथा सिंचाई की जानकारी नहीं रहने पर नुकसान भी उठाना पड़ता है | इसलिए किसान समाधान ने जीरा की खेती की जानकारी लेकर आया है | Cumin Seeds Information

उपयुक्त मिट्टी तथा मौसम

जीरा की खेती दोमट मिट्टी में होती है तथा इसकी खेती सर्दी के मौसम में की जाती है | जीरा की खेती अधिक तापमान में नहीं हो पाता है | जीरा की बुवाई के समय का तापमान 24 से 28 डिग्री सेंटीग्रेट तथा पौधों की वृद्धि के समय 20 से 22 डिग्री सेंटीग्रेट होना चाहिए |

बुवाई कब किया जाना उचित रहता है ?

बुवाई नवम्बर के तीसरे सप्ताह से दिसम्बर के पहले सप्ताह तक हो जाना चाहिए |

खेत की तैयारी कैसे करें ?

खेत को पहले एक देसी हल से करना चाहिए तथा उसके बाद उस खेत को रोटावेटर से जुताई कर देना चाहिए, जिससे मिट्टी छोटी – छोटी हो जाये | इसके बाद खेत में पाटा चला देना चाहिए | खेत में पाटा चला देने के बाद 5 से 8 फीट की क्यारी बना दें | क्यारी बनाने से सिंचाई तथा खरपतवार की सफाई में सुविधा होती है |

उर्वरक ( खाद ) का उपयोग कितना करें ?

जीरे के खेत में प्रति हे. 8 से 10 टन गोबर का खाद उपयोग करें | यह खाद अंतिम जुताई से पहले खेत में मिला दें | इसके साथ ही 65 किलो DAP तथा 9 किलो यूरिया प्रति एकड़ दें | इसके बाद तीसरी सिंचाई यानि 20 दिन के बाद करेंगे तब पौधों को नाईट्रोजन की जरुरत होती है उस समय 35 किलो यूरिया पार्टी एकड़ करें |

बीज का उपयोग कितना और कैसे करें ?

जीरा की बीज 12 किलोग्राम / हे. होता है तथा इसकी बुवाई 1 से 1.5 सेमी. की गहराई तक ही करें | इससे ज्यादा की गहराई पर बोने से बीज की अंकुरण कम होता है | बीज की बुवाई तो छित के होती है लेकिन अगर सीरी विधि से करें तो ज्यादा अच्छा रहता है | इससे खरपतवार निकासी में अच्छा रहता है |

उन्नत किस्में ?

R.Z. – 19, 209,223 , J.C. – 1,2,3, R.S.1S – 404 , गुज्रराती जीरा |

जीरा की खेती कितने दिनों की है ?

जीरा की खेती 120 से 125 दिनों की है |

सिंचाई कब करें?

सिंचाई बुवाई के तुरंत बाद करें | याद रहे सिंचाई हल्की होनी चाहिए तथा तेज धार में नहीं करें | तेज धार में करने से जीरा पानी में बह कर एक जगह पर आ जाता है | दूसरी सिंचाई बुवाई के 7 दिन बाद करें | इसके बाद प्रत्येक 20 दिन के अंतराल पर 4 से 5 सिंचाई आवश्य दें | याद रहे जीरे के फूल पर सिंचाई नहीं करें |

खरपतवार  से जीरा को कैसे बचायें ?

जीरे की बुवाई से पहले खेत से अच्छी तरह से खरपतवार को निकाल दें | इसके बाद जीरे की बुवाई के समय पेंडिमेथालिन के 3, 3 लीटर को 500 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें | इसके बाद जीरा अगर बड़ा हो गया है तब खरपतवार के लिए ओक्सीडाइ जरी नामक खरपतवार नाशी 7.5 ml / 500 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें |

जीरे में लगने वाले रोग

जीरा में झुलसा रोग –  इससे पौधे में बधवार रुक जाता है | तथा पत्तियां मुरझा जाती है |

चरनी तथा फफूंद रोग का लगना

इससे बचाव के लिए 250 लीटर नीम के पत्ती का पानी के साथ 24 ml माइक्रोजाई मिलाकर छिड़काव करें | इसके अलावा सुपर गोल्ड मैगनेशियम 1 किलोग्राम / एकड़ पानी में मिलाकर अच्छी तरह से छिड़काव करें |

नीम का घोल कैसे बनायें ?

25 किलोग्राम नीम की पत्ती को पिस लें इसके बाद 60 लीटर पानी में मिलाकर आग पर रखें | जब पानी 25 लीटर तक बचता है तब यह काला तथा गढ़ा हो जायेगा | तब यह उपयोग करने के लिए उपयुक्त रहेगा | Cumin Seeds Information

उत्पादन

जीरा की प्रति एकड़ उत्पादन 6 से 7 किवंटल होती है | जिसका मूल्य 80 से 90 हजार रूपये तक होगी |